बाबा लखदातार मेरे करदो वारे न्यारे
कर दो वारे न्यारे मेरे कर दो वारे न्यारे,
सुनो बाबा लखदातार मेरे कर दो वारे न्यारे,
सुनते हो सबके मन की मेरी भी सुननी पड़ेगी,
मेरी भी कलाई बाबा तुमको पकड़नी पड़ेगी,
मैं दुर्बल लाचार बाबा कर दो वारे न्यारे,
सुनो बाबा लखदातार मेरे कर दो वारे न्यारे,
चर्चे हैं मोरछड़ी के मेरे भी झाड़ा लगा दो,
मझधार में अटकी नैया आकर के पार लगा दो,
लाखों का किया उद्धार मेरे कर दो वारे न्यारे,
सुनो बाबा लखदातार मेरे कर दो वारे न्यारे,
मुझे ऐसा हुनर सीखा दो तुमको मैं खूब रिझाऊं,
अपने भजनो से बाबा तुमको मोहित कर पाऊं,
मानूंगा आभार मेरे कर दो वारे न्यारे,
सुनो बाबा लखदातार मेरे कर दो वारे न्यारे,
श्रेणी : खाटू श्याम भजन
Baba Lakhdatar | बाबा लखदातार मेरे करदो वारे न्यारे | Khatu Shyam Bhajan | Sunita Goyal
यह एक सुंदर और भावपूर्ण खाटू श्याम भजन है, जिसमें भक्त बाबा लखदातार यानी श्री खाटू श्याम जी से अपने जीवन के दुखों को दूर करने, बिगड़े काम बनाने और अपनी नैया पार लगाने की प्रार्थना करता है। भजन की पंक्तियों “सुनो बाबा लखदातार, मेरे कर दो वारे न्यारे” में भक्त की सच्ची पुकार, विश्वास और बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा दिखाई देती है। इस भजन में भक्त बाबा को अपना सहारा मानकर उनसे कृपा की विनती करता है और विश्वास रखता है कि बाबा उसकी पुकार अवश्य सुनेंगे।
भजन में भक्त अपनी कमजोरियों और परेशानियों को बाबा के सामने रखते हुए कहता है कि जैसे बाबा ने लाखों भक्तों का उद्धार किया है, वैसे ही उसकी भी बिगड़ी तकदीर सँवार दें। “मझधार में अटकी नैया आकर के पार लगा दो” पंक्ति जीवन की कठिनाइयों से बाहर निकलने की आशा को दर्शाती है। मोरछड़ी का उल्लेख बाबा श्याम की कृपा और आशीर्वाद के प्रति भक्त की आस्था को प्रकट करता है। भजन के अंतिम अंतरे में भक्त धन-दौलत से अधिक अपने भजनों के माध्यम से बाबा को प्रसन्न करने की इच्छा व्यक्त करता है। इसका मुख्य भाव दीनता, विनम्रता, समर्पण, विश्वास और बाबा श्याम के प्रति प्रेम है। यह भजन भक्तों को कठिन समय में हिम्मत रखने और अपने आराध्य पर भरोसा बनाए रखने का संदेश देता है।