राधे राधे बोल मनवा कृष्णा कृष्णा बोल
कृष्ण नाम का सुमिरन कर ले मन की आँखें खोल,
राधे राधे बोल मनवा कृष्णा कृष्णा बोल...
मोर मुकुट कानो में कुण्डल मोहन मुरली वाले हैं,
अपनी एक ऊँगली कन्हैया ये संसार संभाले हैं,
मन के तराज़ू से तू बन्दे कृष्ण नाम को तोल,
राधे राधे बोल मनवा कृष्णा कृष्णा बोल...
तू भी प्रीत लगा ले इनसे खो जा इनके प्यार में,
धीरज धार सब अर्पण कर दे दुनिया के बाजार में,
श्याम कृपा जिसपे हो जाती बन जाता अनमोल,
राधे राधे बोल मनवा कृष्णा कृष्णा बोल....
श्रेणी : कृष्ण भजन
Manva Radhe Radhe Bol | मनवा राधे राधे बोल | Radha Ashtami Song | Namrata Karwa
“राधे राधे बोल मनवा कृष्णा कृष्णा बोल” एक भावपूर्ण कृष्ण भजन है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के नाम-स्मरण की महिमा बताई गई है। भजन की मुख्य पंक्ति मनुष्य को प्रेरित करती है कि वह अपने मन को संसार की उलझनों से हटाकर राधे-श्याम की भक्ति में लगाए। इसमें विश्वास, प्रेम, समर्पण और श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करने की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। राधाष्टमी जैसे पावन अवसर पर यह भजन राधा रानी और श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का सुंदर माध्यम है।
भजन की शुरुआत “कृष्ण नाम का सुमिरन कर ले मन की आँखें खोल” पंक्ति से होती है। इसका भाव है कि मनुष्य को केवल बाहरी संसार को देखने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने भीतर भी झांककर आध्यात्मिक सत्य को समझने का प्रयास करना चाहिए। राधे-राधे और कृष्ण-कृष्ण का नाम जपने से भक्त अपने आराध्य के प्रति प्रेम और विश्वास को गहरा कर सकता है। यहां नाम-स्मरण को मन को भक्ति की ओर मोड़ने और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के साधन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अगले अंतरे में भगवान श्रीकृष्ण के मनमोहक स्वरूप का वर्णन किया गया है। मोर मुकुट, कानों के कुंडल और हाथों में मुरली धारण करने वाले कन्हैया की छवि भक्त के हृदय में प्रेम और आनंद जगाती है। “अपनी एक ऊँगली कन्हैया ये संसार संभाले हैं” पंक्ति भगवान के विराट और दिव्य स्वरूप की ओर संकेत करती है। भजन में श्रीकृष्ण को केवल मुरली बजाने वाले मनमोहक बालक के रूप में ही नहीं, बल्कि समस्त संसार के पालन और संचालन से जुड़े परम शक्ति स्वरूप के रूप में भी याद किया गया है।
“मन के तराजू से तू बन्दे कृष्ण नाम को तोल” पंक्ति भक्त को अपने हृदय में श्रीकृष्ण के नाम का महत्व समझने के लिए प्रेरित करती है। संसार में धन-दौलत और बाहरी उपलब्धियों को बहुत महत्व दिया जाता है, लेकिन भक्ति का मूल्य किसी सांसारिक तराजू से नहीं मापा जा सकता। सच्चे मन से लिया गया कृष्ण नाम भक्त के जीवन में प्रेम, धैर्य और आध्यात्मिक संतोष का आधार बन सकता है। यह पंक्ति मनुष्य को अपने जीवन में भक्ति के महत्व पर विचार करने का संदेश देती है।
आगे भजन में श्रीकृष्ण से प्रेम करने और अपने मन को उनकी भक्ति में समर्पित करने की प्रेरणा दी गई है। “तू भी प्रीत लगा ले इनसे, खो जा इनके प्यार में” पंक्ति भक्त और भगवान के बीच प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाती है। संसार के उतार-चढ़ाव के बीच धैर्य बनाए रखना और अपने आराध्य पर विश्वास रखना इस भजन का एक महत्वपूर्ण भाव है। “श्याम कृपा जिसपे हो जाती, बन जाता अनमोल” के माध्यम से बताया गया है कि श्रीकृष्ण की कृपा भक्त के जीवन को आध्यात्मिक दृष्टि से मूल्यवान बना देती है।