सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना
सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
ओ सांवरे..........ओ सांवरे,
ओ सांवरे..........ओ सांवरे,
भरोसा इतना है मुझको के साथी श्याम हमारा है,
मगर दिल का बड़ा कच्चा ये बच्चा श्याम तुम्हारा है,
फिरा फिरा के ऊँगली तू विश्वास जगा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है ........
मुसीबत के दिन आते हैं भरोसा हिलने लगता है,
भगत फिर तेरी नज़रों से कन्हैया गिरने लगता है,
अपनी नज़रो से मुझे नहीं गिरा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है ........
नियम लेले तू बनवारी रोज़ ऊँगली फिराने का,
छूट जायेगा ये झंझट मेरा विश्वास जगाने का,
फिरा फिरा कर प्यार से तू प्यार बढ़ा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना,
घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना,
सर पे तेरा हाथ है ........
श्रेणी : कृष्ण भजन
Sar Pe Tera Haath Hai | सर पे तेरा हाथ है | Heart Touching Shyam Bhajan | Puja Nathani
“सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना” एक भावुक और हृदयस्पर्शी कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण के श्याम स्वरूप से अपने ऊपर उनकी कृपा और संरक्षण का एहसास बनाए रखने की प्रार्थना करता है। भजन में सांवरे को अपना साथी, सहारा और मार्गदर्शक मानते हुए उनसे विनती की गई है कि जब भी मन घबराए या जीवन में कठिनाइयां आएं, तब वे प्रेमपूर्वक अपना हाथ भक्त के सिर पर रखें। इसकी मुख्य पंक्ति “सर पे तेरा हाथ है एहसास करा देना” भगवान के प्रति विश्वास और उनके सान्निध्य की अनुभूति पाने की गहरी इच्छा को व्यक्त करती है।
भजन के पहले अंतरे में भक्त कहता है कि उसे अपने श्याम पर पूरा भरोसा है, लेकिन उसका मन बहुत कोमल है। वह स्वयं को श्याम का बच्चा मानते हुए उनसे प्रार्थना करता है कि जब उसका विश्वास कमजोर पड़ने लगे, तब वे उसे संभाल लें। “घबराये मन सांवरे तो ऊँगली फिरा देना” पंक्ति में एक बहुत ही आत्मीय भाव छिपा है। जिस प्रकार कोई माता-पिता अपने घबराए हुए बच्चे को प्यार से सहलाकर शांत करते हैं, उसी प्रकार भक्त अपने सांवरे से प्रेम और अपनापन चाहता है।
अगले अंतरे में जीवन की कठिनाइयों और उनसे उत्पन्न होने वाली मानसिक बेचैनी का वर्णन है। भजन कहता है कि जब मुसीबतें आती हैं, तो कभी-कभी मनुष्य का विश्वास भी डगमगाने लगता है। ऐसे समय में भक्त को डर रहता है कि कहीं वह अपने आराध्य की कृपा और निकटता से दूर न हो जाए। “अपनी नजरों से मुझे नहीं गिरा देना” पंक्ति भगवान से जुड़े रहने की विनम्र प्रार्थना है। भक्त चाहता है कि उसकी कमजोरियों और परेशानियों के बावजूद श्याम उसे अपनाए रखें और उसका मार्गदर्शन करते रहें।
इस भजन की सबसे सुंदर विशेषता भगवान और भक्त के बीच का मित्रवत तथा बालसुलभ संबंध है। यहां भक्त भगवान से औपचारिक प्रार्थना करने के बजाय उनसे अपने मन की बातें करता है। वह अपने डर, कमजोरी और विश्वास की जरूरत को बिना किसी संकोच के उनके सामने रखता है। इससे यह भाव उभरता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि अपने आराध्य के साथ ऐसा आत्मीय रिश्ता बनाना भी है, जिसमें मनुष्य अपने सुख-दुख खुलकर व्यक्त कर सके।
अंतिम अंतरे में भक्त श्याम से रोज प्रेमपूर्वक अपना हाथ फेरने का नियम बना लेने की बात कहता है। इसका भाव यह है कि यदि उसे बार-बार अपने आराध्य के प्रेम और कृपा का एहसास मिलता रहे, तो उसके मन में विश्वास बनाए रखना आसान हो जाएगा। “फिरा फिरा कर प्यार से तू प्यार बढ़ा देना” पंक्ति भक्त की उस इच्छा को दर्शाती है, जिसमें वह अपने और भगवान के बीच प्रेम का संबंध और अधिक गहरा करना चाहता है। यह विश्वास, स्नेह और समर्पण से भरी हुई एक सरल प्रार्थना है।