आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर
आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर,
रह ना पाएंगे अपने भक्तों से दूर....
दयावान है बलवंत देवा हम सब हैं नादान,
कर दो अपने भक्तों का बाबा तुम कल्याण,
इतनी श्रद्धा रखना क्यों हो जाएं मजबूर,
आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर,
रह ना पाएंगे अपने भक्तों से दूर....
ध्यान लगाकर बलवंत जी का करना तुम आव्हान,
वह दर्शन देने आ जाएंगे बलवंत जी बलवान,
प्यार लुटाते हैं भक्तों पर बलवंत जी भरपूर,
आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर,
रह ना पाएंगे अपने भक्तों से दूर....
करुणा के सागर बाबा बलवंत जी बलवान,
श्री उत्तरमुखी में संकट काटे बाबा मेरे महान,
जिंद भी नाक रगड़ जाते हैं होता जिन्हें गुरूर,
आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर,
रह ना पाएंगे अपने भक्तों से दूर....
श्रेणी : हनुमान भजन
यह “आएंगे जरूर बाबा आएंगे जरूर” एक श्रद्धा और विश्वास से भरा हुआ हनुमान भजन है, जिसमें भक्त बाबा बलवंत जी के प्रति अपनी गहरी आस्था और उनके भक्तों पर बरसने वाली कृपा का वर्णन करता है। भजन का मुख्य भाव यह है कि सच्चे मन से बाबा का ध्यान और आवाहन करने वाले भक्तों को बाबा दर्शन और आशीर्वाद देने अवश्य आते हैं। “रह ना पाएंगे अपने भक्तों से दूर” की पंक्ति बाबा और भक्त के बीच के प्रेमपूर्ण संबंध को दर्शाती है, जिसमें भक्त को विश्वास है कि बाबा अपने सच्चे भक्तों को कभी अकेला नहीं छोड़ते।
इस भजन का मुख्य भाव श्रद्धा, विश्वास, भक्ति और बाबा की कृपा पर पूर्ण भरोसा है। भक्त बाबा को दयावान और बलवान बताते हुए उनसे अपने भक्तों का कल्याण करने की प्रार्थना करता है। “हम सब हैं नादान” कहकर भक्त अपनी विनम्रता और असहायता प्रकट करता है तथा बाबा से ऐसी श्रद्धा देने की कामना करता है कि कठिन परिस्थितियों में भी उसका विश्वास कमजोर न हो। यह भाव भक्त की उस मानसिक स्थिति को दर्शाता है, जिसमें वह अपने जीवन की परेशानियों के बीच ईश्वर को अपना सबसे बड़ा सहारा मानता है।
भजन में बाबा के ध्यान और आवाहन की महिमा भी बताई गई है। भक्तों को विश्वास दिलाया गया है कि यदि वे एकाग्र मन से बाबा बलवंत जी का स्मरण और आवाहन करेंगे, तो बाबा उनकी पुकार सुनकर दर्शन देने अवश्य आएंगे। “प्यार लुटाते हैं भक्तों पर बलवंत जी भरपूर” जैसी पंक्ति बाबा के करुणामयी और भक्तवत्सल स्वरूप को दर्शाती है। यहां बाबा को ऐसे देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो अपने भक्तों से प्रेम करते हैं और उनकी पुकार पर उनकी सहायता के लिए उपस्थित होते हैं।
अंतिम अंतरे में बाबा बलवंत जी को करुणा का सागर और संकटों को दूर करने वाला बताया गया है। “श्री उत्तरमुखी में संकट काटे” जैसी पंक्ति किसी विशेष धार्मिक स्थान या बाबा के धाम की ओर संकेत करती हुई प्रतीत होती है। भजन में यह भाव भी है कि जिन लोगों के मन में अहंकार या गुरूर होता है, वे भी बाबा की शक्ति के सामने झुक जाते हैं। इस प्रकार बाबा को भक्तों के संकट हरने वाले और अहंकार का नाश करने वाले शक्तिशाली देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कुल मिलाकर, यह भजन बाबा बलवंत जी की भक्ति, उनके प्रति अटूट विश्वास और भक्तों के प्रति उनकी करुणा को समर्पित है। इसमें भक्त का विश्वास है कि सच्चे मन से पुकारने पर बाबा अपने भक्तों को दर्शन और आशीर्वाद देने अवश्य आते हैं। उपलब्ध पाठ के आधार पर यह भजन हनुमान भजन की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन इसके मूल गीतकार या रचनाकार का नाम उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा।