चली रे सवारी श्री राम की
जय बोलो जय बोलो जय बोलो,
जय बोलो श्री राम की,
जय बोलो हनुमान की.....
जय बोलो श्री राम की,
जय बोलो हनुमान की,
पास खड़े लक्ष्मण भैया,
और साथ माता जानकी,
अरे चली रे सवारी श्री राम की,
अरे चली रे सवारी श्री राम की......
आगे वान बजरंगी बाला,
राम नाम का पीके प्याला,
रघुवीर सेवा में देखो,
जपते राम के माला,
अरे झूम रहे है भगवाधारी,
श्री राम के भक्त पूजारी,
श्री राम जय कर लगाये,
जय जय श्री राम उच्चारे,
अरे चली रे सवारी श्री राम की,
अरे चली रे सवारी श्री राम की......
राम नाम धूनी रम जाये,
मोह माया छुटी बंधन जाये,
राम नाम जो ध्यान लगाये,
पल में काया वो तर जाये,
श्री राम मरा में बसते,
श्री राम कण-कण में बसते,
नगर बहे श्री राम की धुन में,
जो लोग उसे मिलने को तरसते,
अरे चली रे सवारी श्री राम की,
अरे चली रे सवारी श्री राम की......
जय बोलो जय बोलो जय बोलो,
जय बोलो श्री राम की,
जय बोलो हनुमान की.....
जय बोलो श्री राम की,
जय बोलो हनुमान की,
पास खड़े लक्ष्मण भैया,
और साथ माता जानकी,
अरे चली रे सवारी श्री राम की,
अरे चली रे सवारी श्री राम की......
श्रेणी : राम भजन
यह “चली रे सवारी श्री राम की” एक उत्साह और भक्तिभाव से भरपूर राम भजन है, जिसमें भगवान श्रीराम की भव्य सवारी और उनके साथ चल रहे भक्तों का सुंदर भक्तिमय दृश्य प्रस्तुत किया गया है। भजन की शुरुआत “जय बोलो श्री राम की, जय बोलो हनुमान की” के जयकारे से होती है, जिसमें श्रीराम के साथ हनुमान जी का स्मरण किया गया है। साथ ही भगवान श्रीराम के साथ माता जानकी और लक्ष्मण जी के विराजमान होने का भाव भी प्रस्तुत किया गया है। पूरा भजन ऐसा वातावरण बनाता है, मानो श्रीराम की शोभायात्रा निकल रही हो और भक्त जयकारे लगाते हुए उनके साथ चल रहे हों।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीराम के प्रति प्रेम, श्रद्धा, भक्ति और सामूहिक जयकारे का है। इसमें हनुमान जी को श्रीराम के अनन्य सेवक और भक्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है। “आगे वान बजरंगी बाला” के माध्यम से हनुमान जी को श्रीराम की सवारी के आगे चलते हुए दर्शाया गया है। भगवा धारण किए हुए भक्त श्रीराम के नाम का जयकारा लगाते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह भाव रामभक्तों की उस भावना को दर्शाता है, जिसमें भगवान के नाम का स्मरण करते हुए भक्त आनंद और उत्साह से झूम उठता है।
भजन के अगले हिस्से में राम नाम की महिमा का वर्णन किया गया है। इसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति राम नाम का ध्यान करता है, उसके जीवन से मोह-माया के बंधन धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं और उसे आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। “राम नाम जो ध्यान लगाये, पल में काया वो तर जाये” जैसी पंक्तियों में राम नाम को जीवन को भवसागर से पार लगाने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह भजन भक्तों को सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर भगवान श्रीराम के नाम का स्मरण करने और उनकी भक्ति में मन लगाने की प्रेरणा देता है।
भजन में यह भी भाव व्यक्त किया गया है कि श्रीराम केवल किसी एक स्थान पर नहीं, बल्कि कण-कण में विद्यमान हैं। “श्री राम कण-कण में बसते” की भावना भगवान की सर्वव्यापकता को दर्शाती है। जब पूरा नगर श्रीराम के नाम और जयकारों से गूंज उठता है, तो वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इस प्रकार यह भजन केवल श्रीराम की सवारी का वर्णन नहीं करता, बल्कि राम नाम की शक्ति, श्रीराम की सर्वव्यापकता और भक्तों के सामूहिक उत्साह को भी सुंदर रूप से प्रस्तुत करता है।
कुल मिलाकर, “चली रे सवारी श्री राम की” एक ऐसा भक्तिमय राम भजन है, जो श्रीराम, माता जानकी, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के प्रति श्रद्धा को प्रकट करता है। इसमें श्रीराम की शोभायात्रा, भक्तों के जयकारे, भगवा धारण किए श्रद्धालु और राम नाम की धुन का सुंदर चित्रण मिलता है। यह भजन राम नवमी, श्रीराम शोभायात्रा, धार्मिक जुलूस और राम भक्ति के आयोजनों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त भाव रखता है। उपलब्ध जानकारी में इसके मूल गीतकार या रचनाकार का नाम स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया है, इसलिए बिना प्रमाण के किसी व्यक्ति को इसका लेखक बताना उचित नहीं होगा।