शेरोवाली एक बार मेरे घर आ जाना
शेरोवाली एक बार मेरे घर आ जाना,
हाथ जोड़ के मैं कहती हु सुनलो विनती मेरी,
मैं तो मैया बाट निहारू मैया मेरी गली आ जाना...
रेखा मेरा नाम है मैया तुम सीधी आ जाना,
दाए हाथ पे घर है मेरा देखो ना शर्माना,
ठंडी ठंडी हवा चली है मौसम बड़ा सुहाना,
आए नवराते मैयाजी सबको दर्शन दे जाना,
एक बार हमारी गली.....
मन से तुम्हारी करुगी सेवा और मन की बात बताऊं,
जो कहती हु सच कहती हूं ऐसी वैसी न हू,
हलवा पूरी मैं अपने हाथो से तुम्हे खिलाऊ,
जब आराम करोगी तो प्रेम से चरण द्वाऊ,
एक बार हमारी गली.....
अब तो आजा मैया मेरी दास ये तेरा बुलाए,
दर्शन पाने की इच्छा मेरी मन में ना रह जाए,
भगत तेरे बैठे हैं मैया तेरी आस लगाए,
मन इच्छा पूरी कर दो तेरी जय जय कार बुलाए,
एक बार हमारी गली.....
श्रेणी : दुर्गा भजन
यह “शेरोवाली एक बार मेरे घर आ जाना” एक भावपूर्ण माँ दुर्गा/शेरावाली माता का भजन है, जिसमें भक्त माँ से अपने घर और गली में पधारने की प्रेमपूर्ण विनती करता है। भजन की शुरुआत “शेरोवाली एक बार मेरे घर आ जाना” की पुकार से होती है, जिसमें भक्त हाथ जोड़कर माता से अपने मन की प्रार्थना सुनने और दर्शन देने का अनुरोध करता है। भक्त की सबसे बड़ी इच्छा यही है कि नवरात्रि के पावन अवसर पर माँ उसके घर आएं और उसे अपने दर्शन देकर कृतार्थ करें।
इस भजन का मुख्य भाव माँ के प्रति प्रेम, श्रद्धा, विनम्र प्रार्थना और दर्शन की लालसा है। भक्त स्वयं को माँ का सेवक मानकर उनसे अपने घर आने की विनती करता है। “मैं तो मैया बाट निहारू” के भाव में भक्त की प्रतीक्षा और उत्सुकता दिखाई देती है। वह चाहता है कि माता उसके घर के पास से गुजरते हुए उसकी गली में भी आएं और अपने भक्तों को दर्शन देकर उनकी मनोकामना पूरी करें। यहां माँ का घर आना भक्त के जीवन में उनकी कृपा और आशीर्वाद के आगमन का प्रतीक भी माना जा सकता है।
भजन में भक्त अपने बारे में बताते हुए माँ से कहता है कि उसका नाम रेखा है और वह चाहता है कि माता सीधे उसके घर आएं। “दाए हाथ पे घर है मेरा, देखो ना शर्माना” जैसी सरल पंक्तियां इस भजन को एक लोकभक्ति गीत जैसा सहज और आत्मीय रूप देती हैं। भक्त माता से बिल्कुल अपने परिवार के किसी प्रिय सदस्य की तरह बात करता है और उन्हें अपने घर आने के लिए प्यार से बुलाता है। नवरात्रि के मौसम और सुहानी ठंडी हवा का वर्णन भजन में उत्सव और भक्तिमय वातावरण को और सुंदर बनाता है।
अगले अंतरे में भक्त माँ से वादा करता है कि वह पूरे मन से उनकी सेवा करेगी और अपने हाथों से उन्हें हलवा-पूरी का भोग लगाएगी। माता के विश्राम करने पर उनके चरण दबाने की भावना भक्त की सेवा और समर्पण को दर्शाती है। यहां भक्त का भाव यह है कि वह माँ को केवल पूजना ही नहीं चाहता, बल्कि उन्हें अपने घर की अतिथि और अपनी माता के समान प्रेम और सम्मान देना चाहता है। यह भाव भारतीय भक्ति परंपरा में “अतिथि रूप में भगवान का स्वागत” करने की भावना से भी जुड़ा हुआ है।
अंतिम अंतरे में भक्त अपनी सबसे गहरी इच्छा व्यक्त करता है कि माँ उसके घर जरूर आएं, क्योंकि उनके दर्शन पाने की लालसा उसके मन में बनी हुई है। भक्तों के माँ की राह देखने और उनकी आस लगाए बैठने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। “मन इच्छा पूरी कर दो” के माध्यम से भक्त माता से अपनी मनोकामना पूरी करने और अपने जीवन पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करता है। अंत में माता के जयकारे के साथ भजन का भाव और अधिक भक्तिमय हो जाता है।
कुल मिलाकर, “शेरोवाली एक बार मेरे घर आ जाना” एक सरल, भावुक और लोकभक्ति शैली में रचा गया माता रानी का भजन है। इसमें भक्त की माँ के दर्शन की इच्छा, उनके आगमन की प्रतीक्षा, सेवा-भाव और अटूट श्रद्धा को बहुत सहज शब्दों में व्यक्त किया गया है। भजन विशेष रूप से नवरात्रि और माता के जागरण जैसे अवसरों के भाव से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। उपलब्ध पाठ में “रेखा” नाम का उल्लेख मिलता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह गीत की रचनाकार हैं या भजन की कथा में भक्त का नाम है। इसलिए इसके मूल गीतकार या रचनाकार का नाम निश्चित रूप से बताना उचित नहीं होगा।