मेरा खो गया दिल वृन्दावन धाम में
।। श्री बांके बिहारी जी के भक्तों के दिल की पुकार हैं इस भजन में ।।
मेरा खो गया दिल, वृन्दावन धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मेरा तन, मेरा मन, मेरा पुरा जीवन,
मेने कर दिया सब कुछ, तेरे अर्पण,
मुझे रहना है अब, तेरे धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मेरा खो गया दिल, वृन्दावन धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मुझे तेरा ही भरोसा, मुझे तेरा ही सहारा,
मुझे लगता है श्याम, तेरा धाम ये प्यारा,
मुझे रहना है अब, तेरे धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मेरा खो गया दिल, वृन्दावन धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मुझे सोना नहीं भावे, मुझे चांदी नहीं भावे,
मुझे हीरा नहीं भावे, मुझे मोती नहीं भावे,
मुझे मिलता है सुख, तेरे धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
मेरा खो गया दिल, वृन्दावन धाम में,
मेरा लागे नहीं मन, किसी काम में,
Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
मेरा खो गया दिल वृन्दावन धाम में, मेरा लागे नहीं मन किसी काम में ।। #vrindavan #vrindavandham
यह “मेरा खो गया दिल, वृन्दावन धाम में” एक भावपूर्ण श्री बाँके बिहारी जी और वृन्दावन धाम को समर्पित कृष्ण भजन है। इस भजन में भक्त अपने मन की वह अवस्था व्यक्त करता है, जब उसका मन संसार के कामों और भौतिक सुख-सुविधाओं से हटकर पूरी तरह वृन्दावन धाम और श्री कृष्ण की भक्ति में रम जाता है। “मेरा खो गया दिल वृन्दावन धाम में” पंक्ति इसी गहरी भक्ति और वृन्दावन के प्रति भक्त के आत्मिक आकर्षण को दर्शाती है।
इस भजन का मुख्य भाव समर्पण, प्रेम, वैराग्य और श्री कृष्ण के प्रति अटूट विश्वास का है। भक्त कहता है कि उसने अपना तन, मन और पूरा जीवन ठाकुर जी को अर्पित कर दिया है और अब उसकी इच्छा केवल उनके धाम में रहने की है। यहां “तेरा ही भरोसा, तेरा ही सहारा” जैसी पंक्तियां यह बताती हैं कि भक्त अपने जीवन का आधार संसार को नहीं, बल्कि भगवान श्री कृष्ण को मानता है।
भजन में वृन्दावन धाम की आध्यात्मिक महिमा को भी बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। भक्त के लिए वृन्दावन केवल एक स्थान नहीं, बल्कि वह पवित्र धाम है जहां उसे अपने आराध्य का सान्निध्य और मन की शांति महसूस होती है। इसी कारण उसका मन किसी दूसरे काम में नहीं लगता और वह बार-बार अपने प्यारे श्याम के धाम में रहने की इच्छा करता है।
इस भजन की एक विशेष भावना भौतिक सुखों से विरक्ति में दिखाई देती है। भक्त कहता है कि उसे सोना, चांदी, हीरे और मोती भी आकर्षित नहीं करते, क्योंकि उसे जो सच्चा सुख चाहिए, वह उसे श्री कृष्ण के धाम में मिलता है। इन पंक्तियों के माध्यम से भजन यह संदेश देता है कि सांसारिक धन-संपत्ति से मिलने वाला सुख क्षणिक हो सकता है, जबकि भगवान की भक्ति से मिलने वाली आत्मिक शांति भक्त के लिए कहीं अधिक मूल्यवान होती है।
Harshit Ji ,
ReplyDeleteThank You , !! Radhe Radhe !!