हराने की मुझको कसम सब ने खाई
हराने की मुझको, कसम सब ने खाई,
मगर मुझको कान्हा ने, जीत दिलाई,
मेरे अपने सारे, सभी मुझसे रूठे,
बस एक पल में ही, सारे रिश्ते वो टूटे,
डूबने लगी जब, मेरे जीवन की नय्या,
तब कान्हा ने नय्या, मेरी पार लगाई,
हराने की मुझको, कसम सब ने खाई,
मगर मुझको कान्हा ने, जीत दिलाई,
जिसे अपना समझा, वो निकले पराए,
दिल की ये बाते, अब किसको बताए,
अंधेरे में डूबा, जब जीवन ये मेरा,
तब कान्हा ने मुझको, नई रोशनी दिखाई,
हराने की मुझको, कसम सब ने खाई,
मगर मुझको कान्हा ने, जीत दिलाई,
अब ना किसी पे, भरोसा करूंगा,
जब तक जियूंगा, कान्हा की भक्ति करूंगा,
अब राहे नई है, ये जीवन नया है,
चलूंगा में उसी राह पर, जो कान्हा ने दिखाई,
हराने की मुझको, कसम सब ने खाई,
मगर मुझको कान्हा ने, जीत दिलाई,
Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore
श्रेणी : कृष्ण भजन
हराने की मुझको कसम सब ने खाई , मगर मुझको कान्हा ने जीत दिलाई ।। #krishnabhajan #krishna #bhajan
“हराने की मुझको कसम सब ने खाई” एक भावपूर्ण कृष्ण भजन है, जिसमें जीवन के संघर्षों, अपनों से मिले दुख और कठिन समय में भगवान श्रीकृष्ण के सहारे की भावना व्यक्त की गई है। भजन की मुख्य पंक्ति “मगर मुझको कान्हा ने जीत दिलाई” यह विश्वास दर्शाती है कि जब संसार के लोग साथ छोड़ देते हैं और जीवन में निराशा छा जाती है, तब कान्हा अपने भक्त का सहारा बनते हैं। इसमें श्रीकृष्ण के प्रति अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण का भाव प्रमुख है।
भजन में बताया गया है कि जब अपने ही रूठ गए, रिश्ते टूट गए और जीवन की नैया डूबने लगी, तब कान्हा ने उसे पार लगाया। अंधकार से भरे जीवन में श्रीकृष्ण ने नई रोशनी दिखाई और आगे बढ़ने का रास्ता बताया। अंतिम अंतरे में भक्त सांसारिक भरोसों से ऊपर उठकर अपना जीवन कान्हा की भक्ति में समर्पित करने का संकल्प लेता है। “चलूंगा मैं उसी राह पर, जो कान्हा ने दिखाई” पंक्ति इस विश्वास को प्रकट करती है कि सच्चा सहारा भगवान हैं और उनकी दिखाई राह पर चलकर जीवन को नई दिशा मिल सकती है। इस भजन के गीतकार के रूप में Jay Prakash Verma, Indore का नाम स्पष्ट रूप से दिया गया है।
Radhe Radhe Sir Ji
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